हमारे बारे में
जैव विविधता अधिनियम, 2002 के अंतर्गत गठित।
बिहार राज्य जैव विविधता पर्षद् को भारत सरकार द्वारा अधिसूचित जैव विविधता अधिनियम, 2002 की प्रावधानों के अनुसार राज्य सरकार द्वारा गठित किया गया है। जैव विविधता अधिनियम, 2002 की धारा 63(1) के प्रावधान के तहत बिहार जैव विविधता नियम, 2004 को राज्य सरकार द्वारा 17.12.2004 को अधिसूचित किया गया। पर्षद् के गठन संबंधी अधिसूचना 27 मार्च 2017 को जारी की गई।
जैव विविधता या बायोडाइवर्सिटी शब्द पृथ्वी पर विद्यमान जीवन रूपों की संपूर्ण विविधता और परिवर्तनशीलता को संदर्भित करता है। इसमें स्तनधारियों, पक्षियों, सरीसृप, उभयचर, मछलियों, कीटों और अन्य अकशेरुकी जीवों के साथ-साथ पौधों, कवक और प्रोटिस्ट, बैक्टीरिया तथा वायरस जैसे अन्य सूक्ष्मजीवों की पूरी श्रृंखला शामिल है। पृथ्वी पर जैव विविधता तीन स्तरों पर व्यक्त होती है — आनुवंशिक विविधता, प्रजाति विविधता और पारिस्थितिकी तंत्र विविधता। इसकी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष सेवाएँ इस ग्रह पर जीवन के निरंतरता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
जैव विविधता भोजन, ईंधन, आश्रय, दवाएँ और अन्य संसाधन सुनिश्चित करती है जो हमारे अस्तित्व के लिए अत्यावश्यक हैं। अधिकांश फसलों के कीटों को कीट, पक्षी और कवक सहित विभिन्न अन्य जीवों द्वारा नियंत्रित किया जाता है, जो व्यापक रूप से उपयोग किए जाने वाले उनके रासायनिक समकक्षों की तुलना में निश्चित रूप से बेहतर प्राकृतिक कीटनाशक हैं, जो मनुष्यों और पर्यावरण के लिए वास्तव में हानिकारक हैं। कई पुष्पी पौधे परागण और बीज प्रसार के लिए कीट, चमगादड़ और पक्षी जैसे जीव प्रजातियों पर निर्भर करते हैं। जैव विविधता, और भी महत्वपूर्ण बात, मानव जाति के लिए संसाधनों और सेवाओं की एक विस्तृत श्रृंखला प्रदान करती है। विविध प्रजातियाँ आजीविका के विविधीकरण को सक्षम बनाती हैं और वर्ष भर खाद्य उत्पादन को संभव बनाती हैं।
बिहार राज्य जैव विविधता पर्षद की गतिविधियों को निम्नलिखित विषयगत क्षेत्रों में वर्गीकृत किया गया है:
- अनुसंधान एवं दस्तावेजीकरण
- शिक्षा, जागरूकता एवं प्रशिक्षण
- यथास्थान (इन-सीटू) एवं बहिःस्थान (एक्स-सीटू) संरक्षण
- सतत उपयोग एवं लाभों का न्यायसंगत बंटवारा
- नीति एवं विधि
- हरित एवं जलीय स्थलों (ग्रीन एंड ब्लू स्पेस) तक पहुँच में वृद्धि करना।
- जैव सुरक्षा नियामक क्षमता को सुदृढ़ करना।
- क्षमता विकास, प्रौद्योगिकी एवं वैज्ञानिक सहयोग।
- इस अधिनियम के प्रावधानों को क्रियान्वित करने हेतु आवश्यक अन्य ऐसे कार्य करना जो राज्य सरकार द्वारा निर्धारित किए जाएँ।
- भारतीयों द्वारा किसी भी जैविक संसाधन के वाणिज्यिक उपयोग या जैव-सर्वेक्षण एवं जैव-उपयोग हेतु अनुरोधों को अनुमोदन प्रदान कर अथवा अन्यथा विनियमित करना;
- जैव विविधता के संरक्षण, इसके घटकों के सतत उपयोग, तथा जैविक संसाधनों के उपयोग से उत्पन्न लाभों के न्यायसंगत बंटवारे से संबंधित विषयों पर, केंद्र सरकार द्वारा जारी किसी भी दिशा-निर्देश के अधीन, राज्य सरकार को सलाह देना।



