जैव विविधता प्रबंधन समितियाँ
जैव विविधता अधिनियम, 2002 के तहत स्थानीय निकाय स्तर पर जैव विविधता प्रबंधन समिति का गठन, संरचना एवं प्रबंधन।
जैव विविधता प्रबंधन समिति (बी०एम०सी०)
अधिनियम की धारा 41 के अनुसार, प्रत्येक स्थानीय निकाय अपने क्षेत्र के लिए जैव विविधता प्रबंधन समिति (Biodiversity Management Committee- BMC) का गठन करेगा, जिसका उद्देश्य जैव विविधता के संरक्षण, संवहनीय उपयोग एवं अभिलेखन को बढ़ावा देना है। जैव विविधता अधिनियम को जमीनी स्तर पर कार्यान्वित करने हेतु बी०एम०सी० का गठन एक महत्वपूर्ण बुनियादी व्यवस्था है तथा इसकी वैधानिक स्थिति स्वायत्तशासी निकाय के रूप में है।
जैव विविधता प्रबंधन समिति की संरचना
1. बी.एम.सी. के गठन हेतु सर्वप्रथम सम्बन्धित स्थानीय निकाय के अध्यक्ष द्वारा स्थानीय निकाय की एक आम बैठक बुलायी जाएगी।
2. बैठक में आम सहमति से अधिकतम 06 व्यक्तियों को समिति का सदस्य चयनित किया जाएगा, जिनका नाम सम्बंधित स्थानीय निकाय की मतदाता सूची (वोटर लिस्ट) में अवश्य होने चाहिए। समिति की संरचना निम्नवत् होगी:—
1. अध्यक्ष (किसी भी वर्ग का) — 1
2. महिला सदस्य (किसी भी वर्ग का) — 2
3. अनु० जा०/ अनु० जन जा० सदस्य — 1
4. सदस्य (किसी भी वर्ग का) — 2
3. विभिन्न स्तरों पर गठित जैव विविधता प्रबंधन समितियों के सदस्य सचिव स्थानीय निकायों के निम्नलिखित पदाधिकारी होंगे—
ग्राम पंचायत — पंचायत सचिव
पंचायत समिति — प्रखण्ड विकास पदाधिकारी
जिला परिषद — जिला परिषद् के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी
नगर निकाय — संबंधित नगर निकाय के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी
4. इस प्रकार प्रत्येक बी०एम०सी० में सचिव सहित कुल 07 सदस्य होंगे।
5. जैव विविधता प्रबंधन समिति के अध्यक्ष को समिति के सदस्यों द्वारा चुना जाएगा। उस बैठक की अध्यक्षता स्थानीय निकाय का अध्यक्ष करेंगे। स्थानीय निकाय के अध्यक्ष के पास समान मत होने की स्थिति में निर्णायक मत का अधिकार होगा। जैव विविधता प्रबन्धन समिति के सचिव को मत देने का अधिकार नहीं होगा।
बी०एम०सी० का कार्यकाल
1. बी०एम०सी० का कार्यकाल 05 वर्ष/यानी स्थानीय निकाय के कार्यकाल के समरूप होगा। नई समिति के गठन होने तक पूर्व गठित समिति यथावत कार्य करती रहेगी।
2. स्थानीय निकायों का कार्यकाल समाप्त होने की स्थिति में जैव विविधता प्रबंधन समितियों का कार्यकाल स्थानीय निकायों के कार्यों के निष्पादन हेतु सरकार द्वारा गठित "परामर्शी समिति" के कार्यकाल तक विस्तारित होगा।
3. बी०एम०सी० के अध्यक्ष का कार्यकाल समिति के कार्यकाल के समरूप होगा।
विवादों के निपटारे के लिए अपील
किसी आदेश/निदेश या किसी नीतिगत निर्णय को लागू करने के संबंध में विवाद के निपटारे हेतु बिहार राज्य जैव विविधता नियमावली, 2017 के नियम—27 में प्रावधान निम्नवत् है:—
(क) अपीलीय प्राधिकार:—
(ख) अपील की प्रक्रिया:—
1. अपील के ज्ञापन में निम्न सूचनाओं का उल्लेख तथा अभिलेख की संलग्नता अपेक्षित है:—
(i) मामले का तथ्य
(ii) आवेदक के अपील का आधार
(iii) अपेक्षित राहत का विवरण
(iv) उस आदेश या नीति निर्णय जिसके कारण अपीलार्थी व्यथित हुआ था, की अभिप्रमाणित प्रति
2. अपील का ज्ञापन अपीलार्थी अथवा उसके प्राधिकृत प्रतिनिधि द्वारा हस्ताक्षरित होगा।
3. आपील का ज्ञापन चार प्रतियों में निबंधित डाक से आदेश, निदेश या नीति निर्णय की तारीख से 30 दिनों के भीतर प्रस्तुत किया जायेगा।
2. राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण एवं राज्य जैव विविधता पर्षद स्थानीय निकाय के क्षेत्रीय अधिकारिता में उपलब्ध जैव संसाधनों तक पहुँच एवं उसके सहबद्ध ज्ञान के उपयोग के सम्बंध में निर्णय लेने से पूर्व बी०एम०सी० से परामर्श करेंगे।
स्थानीय जैव विविधता निधि का प्रबन्धन
1. अधिनियम की धारा—42, 43 एवं 44 द्वारा गठित एवं विनियोजित स्थानीय जैव विविधता निधि का संचालन जैव विविधता प्रबंधन समिति के अध्यक्ष की मुहर एवं हस्ताक्षर से होगा।
2. जैव विविधता निधि के संचालन हेतु दो लेखा शीर्ष होंगे:—
(क) प्राधिकरण, केन्द्र एवं राज्य सरकार तथा पर्षद से प्राप्ति।
(ख) फीस तथा समिति की अन्य प्राप्तियाँ।
3. समिति को प्राप्त समस्त आय को बैंक खाते में रखा जाएगा।
4. राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण तथा राज्य जैव विविधता पर्षद द्वारा ग्रांट के रूप में बी०एम०सी० के खाते में राशि जमा करवाई जाएगी जिसे संबंधित बी०एम०सी० द्वारा जैव विविधता संरक्षण एवं प्रबन्धन हेतु खर्च किया जाएगा।
5. बी०एम०सी० द्वारा समस्त भुगतान चेक द्वारा किया जाएगा जिस पर समिति के अध्यक्ष तथा सचिव के हस्ताक्षर संयुक्त रूप से होंगे।
6. बी०एम०सी० के धन को संभालने की जिम्मेदारी समिति के सचिव की है, जो प्राप्ति जमा धनराशि के हस्तान्तरण तथा लेखा के उचित प्रकार से रख—रखाव हेतु भी उत्तरदायी होंगे।
7. बी०एम०सी० के खातों का वार्षिक लेखा परीक्षण इस कार्य हेतु नियुक्त लेखा परीक्षकों से कराया जाएगा, जिसकी प्रति स्थानीय निकाय तथा राज्य जैव विविधता पर्षद को भी प्रेषित की जाएगी।
अपीलीय प्राधिकार
| क्र०स० | विवाद के पक्षकार | अपीलीय प्राधिकार | अपील हेतु प्रपत्र |
|---|---|---|---|
| 1. | जैव विविधता समितियों के बीच | बिहार राज्य जैव विविधता पर्षद | नियमावली का प्रपत्र—IV |
| 2. | जैव विविधता समिति एवं स्थानीय निकायों के बीच | बिहार राज्य जैव विविधता पर्षद | नियमावली का प्रपत्र—IV |
| 3. | जैव विविधता समिति एवं जैव विविधता पर्षद के बीच | प्रधान सचिव/सचिव, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग | नियमावली का प्रपत्र— V |
बीएमसी के गठन की स्थिति
| स्थानीय निकाय का स्तर | स्थानीय निकायों की संख्या | बीएमसी का गठन | शेष |
|---|---|---|---|
| ग्राम पंचायत स्तर | 8054 | 8054 | शून्य |
| प्रखंड स्तर | 533 | 532 | 1 |
| जिला स्तर | 38 | 38 | शून्य |
| नगर निकाय स्तरीय | 261 | 74 | 187 |
| कुल | 8886 | 8698 | 188 |
सभी बी०एम०सी० सदस्यों का विवरण
राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण / बिहार राज्य जैव विविधता पर्षद द्वारा बी०एम०सी० के संचालन के लिए दिशानिर्देश के लिए कृपया यहाँ क्लिक करें
बी०एम०सी० ट्रेनिंग की स्थिति
| कुल प्रस्तावित प्रशिक्षण | पूर्ण प्रशिक्षण | आगामी प्रशिक्षण |
|---|---|---|
| 90 | 43 | 47 |



